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mahabharat 3.202.14: हे राजन! पूर्वकाल के राजाओं ने जिस धर्म का पालन किया था, वही धर्म सामान्य लोगों द्वारा सहज ही पालन किया जाता है। ऐसा धर्म अन्य किसी कार्य में नहीं देखा जाता॥14॥   |   mahabharat अध्याय 3.202: उत्तङ्कका राजा बृहदश्वसे धुन्धुका वध करनेके लिये आग्रह   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 202: उत्तङ्कका राजा बृहदश्वसे धुन्धुका वध करनेके लिये आग्रह  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.202.14 
ईदृशो न हि राजेन्द्र धर्म: क्वचन दृश्यते।
प्रजानां पालने यो वै पुरा राजर्षिभि: कृत:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! पूर्वकाल के राजाओं ने जिस धर्म का पालन किया था, वही धर्म सामान्य लोगों द्वारा सहज ही पालन किया जाता है। ऐसा धर्म अन्य किसी कार्य में नहीं देखा जाता॥14॥
 
O King! The religion followed by the kings of the past is easily followed by the common people. Such religion is not seen in any other work.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)