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mahabharat 3.201.9: मार्कण्डेय बोले, "राजा युधिष्ठिर! सुनो। धुन्धुमार की कथा गुणों से परिपूर्ण है। अब मैं उसे सुनाता हूँ, ध्यानपूर्वक सुनो।"   |   mahabharat अध्याय 3.201: उत्तङ्ककी तपस्यासे प्रसन्न होकर भगवान‍्का उन्हें वरदान देना तथा इक्ष्वाकुवंशी राजा कुवलाश्वका धुन्धुमार नाम पड़नेका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 201: उत्तङ्ककी तपस्यासे प्रसन्न होकर भगवान‍्का उन्हें वरदान देना तथा इक्ष्वाकुवंशी राजा कुवलाश्वका धुन्धुमार नाम पड़नेका कारण बताना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.201.9 
मार्कण्डेय उवाच
हन्त ते कथयिष्यामि शृणु राजन् युधिष्ठिर।
धर्मिष्ठमिदमाख्यानं धुन्धुमारस्य तच्छृणु॥ ९॥
 
 
अनुवाद
मार्कण्डेय बोले, "राजा युधिष्ठिर! सुनो। धुन्धुमार की कथा गुणों से परिपूर्ण है। अब मैं उसे सुनाता हूँ, ध्यानपूर्वक सुनो।"
 
Markandeya said, "King Yudhishthira! Listen. The story of Dhundhumar is full of virtues. Now I will narrate it, listen carefully.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)