श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 201: उत्तङ्ककी तपस्यासे प्रसन्न होकर भगवान‍्का उन्हें वरदान देना तथा इक्ष्वाकुवंशी राजा कुवलाश्वका धुन्धुमार नाम पड़नेका कारण बताना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.201.7 
एतदिच्छामि तत्त्वेन ज्ञातुुं भार्गवसत्तम।
विपर्यस्तं यथा नाम कुवलाश्वस्य धीमत:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
भृगुश्रेष्ठ! मैं बुद्धिमान राजा कुवलाश्व के इस नाम-परिवर्तन का वास्तविक कारण जानना चाहता हूँ ॥7॥
 
‘Bhrigu Shrestha! I want to know the real reason for this change of name of the wise king Kuvalashva. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)