श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 201: उत्तङ्ककी तपस्यासे प्रसन्न होकर भगवान‍्का उन्हें वरदान देना तथा इक्ष्वाकुवंशी राजा कुवलाश्वका धुन्धुमार नाम पड़नेका कारण बताना  »  श्लोक 4-5h
 
 
श्लोक  3.201.4-5h 
न तेऽस्त्यविदितं किञ्चिदस्मिँल्लोके द्विजोत्तम।
कथां वेत्सि मुने दिव्यां मनुष्योरगरक्षसाम्॥ ४॥
देवगन्धर्वयक्षाणां किन्नराप्सरसां तथा।
 
 
अनुवाद
'द्विजश्रेष्ठ! इस संसार में ऐसी कोई वस्तु नहीं है जो आपसे अज्ञात हो। मुने! आप मनुष्यों, नागों, राक्षसों, देवताओं, गन्धर्वों, यक्षों, किन्नरों और अप्सराओं की दिव्य कथाओं को भी जानते हैं। 4 1/2॥
 
‘Dwijashrestha! There is nothing in this world that is unknown to you. Mune! You also know the divine stories of humans, snakes, demons, gods, Gandharvas, Yakshas, ​​Kinnars and Apsaras. 4 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)