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mahabharat 3.201.31-32h: ब्राह्मण! धुंधु नाम का एक महादैत्य तीनों लोकों का नाश करने के लिए घोर तपस्या कर रहा है। मैं उस महादैत्य का वध करने वाले वीर पुरुष का परिचय देता हूँ। सुनो।   |   mahabharat अध्याय 3.201: उत्तङ्ककी तपस्यासे प्रसन्न होकर भगवान‍्का उन्हें वरदान देना तथा इक्ष्वाकुवंशी राजा कुवलाश्वका धुन्धुमार नाम पड़नेका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 201: उत्तङ्ककी तपस्यासे प्रसन्न होकर भगवान‍्का उन्हें वरदान देना तथा इक्ष्वाकुवंशी राजा कुवलाश्वका धुन्धुमार नाम पड़नेका कारण बताना  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  3.201.31-32h 
उत्सादनार्थं लोकानां धुन्धुर्नाम महासुर:॥ ३१॥
तपस्यति तपो घोरं शृणु यस्तं हनिष्यति।
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण! धुंधु नाम का एक महादैत्य तीनों लोकों का नाश करने के लिए घोर तपस्या कर रहा है। मैं उस महादैत्य का वध करने वाले वीर पुरुष का परिचय देता हूँ। सुनो।
 
Brahmin! There is a great demon named Dhundhu who is performing severe penance to destroy the three worlds. I will introduce the brave man who will kill that great demon. Listen.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)