श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 201: उत्तङ्ककी तपस्यासे प्रसन्न होकर भगवान‍्का उन्हें वरदान देना तथा इक्ष्वाकुवंशी राजा कुवलाश्वका धुन्धुमार नाम पड़नेका कारण बताना  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  3.201.30-31h 
श्रीभगवानुवाच
सर्वमेतद्धि भविता मत्प्रसादात् तव द्विज।
प्रतिभास्यति योगश्च येन युक्तो दिवौकसाम्॥ ३०॥
त्रयाणामपि लोकानां महत् कार्यं करिष्यसि।
 
 
अनुवाद
श्री भगवान बोले - हे ब्राह्मण! मेरी कृपा से तुम्हें यह सब प्राप्त होगा। इसके अतिरिक्त तुम्हारे हृदय में उस योगविद्या का प्रकाश होगा जिससे तुम देवताओं तथा तीनों लोकों के महान कार्य सम्पन्न कर सकोगे। 30 1/2॥
 
Shri Bhagwan said – Brahmin! By my grace you will achieve all this. Apart from this, there will be the light of that Yogavidya in your heart with which you will be able to accomplish the great work of the gods and the three worlds. 30 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)