Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.201.27-28h: मार्कण्डेयजी कहते हैं - भरतश्रेष्ठ! इस प्रकार भगवान विष्णु द्वारा वर माँगने के लिए कहे जाने पर उत्तंक ने हाथ जोड़कर इस प्रकार वर माँगा ॥27 1/2॥ | mahabharat अध्याय 3.201: उत्तङ्ककी तपस्यासे प्रसन्न होकर भगवान्का उन्हें वरदान देना तथा इक्ष्वाकुवंशी राजा कुवलाश्वका धुन्धुमार नाम पड़नेका कारण बताना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मार्कण्डेय उवाच
एवं स छन्द्यमानस्तु वरेण हरिणा तदा॥ २७॥
उत्तङ्क: प्राञ्जलिर्वव्रे वरं भरतसत्तम।
अनुवाद
मार्कण्डेयजी कहते हैं - भरतश्रेष्ठ! इस प्रकार भगवान विष्णु द्वारा वर माँगने के लिए कहे जाने पर उत्तंक ने हाथ जोड़कर इस प्रकार वर माँगा ॥27 1/2॥
Markandeyaji says- Bharatshrestha! Thus, when requested by Lord Vishnu to seek a boon, Uttanka folded his hands and asked for the boon in this manner. 27 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥