Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.201.24-25h: महात्मा उत्तंक की इस प्रकार स्तुति करने पर समस्त इन्द्रियों को प्रेरित करने वाले भगवान विष्णु ने उनसे कहा - 'महर्षि! मैं तुम पर अत्यन्त प्रसन्न हूँ। तुम वर माँगों।' 24 1/2॥ | mahabharat अध्याय 3.201: उत्तङ्ककी तपस्यासे प्रसन्न होकर भगवान्का उन्हें वरदान देना तथा इक्ष्वाकुवंशी राजा कुवलाश्वका धुन्धुमार नाम पड़नेका कारण बताना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महात्मा उत्तंक की इस प्रकार स्तुति करने पर समस्त इन्द्रियों को प्रेरित करने वाले भगवान विष्णु ने उनसे कहा - 'महर्षि! मैं तुम पर अत्यन्त प्रसन्न हूँ। तुम वर माँगों।' 24 1/2॥
On praising Mahatma Uttanka in this way, Lord Vishnu, the inspirer of all the senses, said to him - 'Maharshe! I am very happy with you. You ask for a groom. 24 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥