Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.201.23-24h: महाद्युते! आपके क्रोध के कारण ही दैत्य राजा देवताओं के समक्ष पराजित होते हैं। आप इस संसार के समस्त जीवों के रचयिता और संहारक हैं। हे प्रभु! आपकी आराधना मात्र से ही समस्त देवता सुख और समृद्धि प्राप्त करते हैं। 23 1/2॥ | mahabharat अध्याय 3.201: उत्तङ्ककी तपस्यासे प्रसन्न होकर भगवान्का उन्हें वरदान देना तथा इक्ष्वाकुवंशी राजा कुवलाश्वका धुन्धुमार नाम पड़नेका कारण बताना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पराभूताश्च दैत्येन्द्रास्त्वयि क्रुद्धे महाद्युते।
त्वं हि कर्ता विकर्ता च भूतानामिह सर्वश:॥ २३॥
आराधयित्वा त्वां देवा: सुखमेधन्ति सर्वश:।
अनुवाद
महाद्युते! आपके क्रोध के कारण ही दैत्य राजा देवताओं के समक्ष पराजित होते हैं। आप इस संसार के समस्त जीवों के रचयिता और संहारक हैं। हे प्रभु! आपकी आराधना मात्र से ही समस्त देवता सुख और समृद्धि प्राप्त करते हैं। 23 1/2॥
Mahadyute! It is because of your anger that the demon kings are defeated in front of the gods. You are the creator and destroyer of all living beings in this world. Lord! All the gods attain happiness and prosperity only by worshiping you. 23 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥