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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 201: उत्तङ्ककी तपस्यासे प्रसन्न होकर भगवान‍्का उन्हें वरदान देना तथा इक्ष्वाकुवंशी राजा कुवलाश्वका धुन्धुमार नाम पड़नेका कारण बताना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.201.22 
असुराणां समृद्धानां विनाशश्च त्वया कृत:।
तव विक्रमणैर्देवा निर्वाणमगमन् परम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
आपने समृद्ध दानवों का नाश किया है। आपके पराक्रम से देवताओं को परम शांति और सुख प्राप्त हुआ है। 22.
 
You have destroyed the prosperous demons. Due to your prowess, the gods have enjoyed supreme peace and happiness. 22.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)