Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.201.18: हे प्रभु! इन्द्र, सोम, अग्नि, वरुण, दैत्य और महासर्प सभी आपके चरणों में नतमस्तक हैं, आपकी स्तुति में अनेक स्तोत्र गाते हैं और हाथ जोड़कर आपको नमस्कार करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 3.201: उत्तङ्ककी तपस्यासे प्रसन्न होकर भगवान‍्का उन्हें वरदान देना तथा इक्ष्वाकुवंशी राजा कुवलाश्वका धुन्धुमार नाम पड़नेका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 201: उत्तङ्ककी तपस्यासे प्रसन्न होकर भगवान‍्का उन्हें वरदान देना तथा इक्ष्वाकुवंशी राजा कुवलाश्वका धुन्धुमार नाम पड़नेका कारण बताना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.201.18 
इन्द्रसोमाग्निवरुणा देवासुरमहोरगा:।
प्रह्वास्त्वामुपतिष्ठन्ति स्तुवन्तो विविधै: स्तवै:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! इन्द्र, सोम, अग्नि, वरुण, दैत्य और महासर्प सभी आपके चरणों में नतमस्तक हैं, आपकी स्तुति में अनेक स्तोत्र गाते हैं और हाथ जोड़कर आपको नमस्कार करते हैं।
 
O Lord! Indra, Som, Agni, Varuna, the demons and the great serpents all bow down before you, recite various hymns in your praise and salute you with folded hands.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)