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mahabharat 3.201.12: महाराज! महाबली उत्तंक ने भगवान विष्णु की आराधना की इच्छा से अनेक वर्षों तक अत्यन्त कठिन तपस्या की थी॥12॥   |   mahabharat अध्याय 3.201: उत्तङ्ककी तपस्यासे प्रसन्न होकर भगवान‍्का उन्हें वरदान देना तथा इक्ष्वाकुवंशी राजा कुवलाश्वका धुन्धुमार नाम पड़नेका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 201: उत्तङ्ककी तपस्यासे प्रसन्न होकर भगवान‍्का उन्हें वरदान देना तथा इक्ष्वाकुवंशी राजा कुवलाश्वका धुन्धुमार नाम पड़नेका कारण बताना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.201.12 
उत्तङ्कस्तु महाराज तपोऽतप्यत् सुदुश्चरम्।
आरिराधयिषुर्विष्णुं बहून् वर्षगणान् विभु:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
महाराज! महाबली उत्तंक ने भगवान विष्णु की आराधना की इच्छा से अनेक वर्षों तक अत्यन्त कठिन तपस्या की थी॥12॥
 
Maharaj! The influential Uttanka had performed extremely difficult penance for many years with the desire to worship Lord Vishnu. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)