Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.200.78: ब्राह्मणों का क्रोध ही उनका शस्त्र है। ब्राह्मण लोहे के शस्त्रों से युद्ध नहीं करते। जैसे इंद्र हाथ में वज्र लेकर राक्षसों का वध करते हैं, वैसे ही ब्राह्मण अपने क्रोध से अपराधियों का नाश करते हैं। 78. | mahabharat अध्याय 3.200: निन्दित दान, निन्दित जन्म, योग्य दानपात्र, श्राद्धमें ग्राह्य और अग्राह्य ब्राह्मण,दानपात्रके लक्षण, अतिथि-सत्कार, विविध दानोंका महत्त्व, वाणीकी शुद्धि, गायत्रीजप, चित्तशुद्धि तथा इन्द्रिय-निग्रह आदि विविध विषयोंका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मन्युप्रहरणा विप्रा न विप्रा: शस्त्रयोधिन:।
निहन्युर्मन्युना विप्रा वज्रपाणिरिवासुरान्॥ ७८॥
अनुवाद
ब्राह्मणों का क्रोध ही उनका शस्त्र है। ब्राह्मण लोहे के शस्त्रों से युद्ध नहीं करते। जैसे इंद्र हाथ में वज्र लेकर राक्षसों का वध करते हैं, वैसे ही ब्राह्मण अपने क्रोध से अपराधियों का नाश करते हैं। 78.
The Brahmins' anger is their weapon. Brahmins do not fight with iron weapons. Just as Indra kills the demons with a thunderbolt in his hand, Brahmins destroy criminals with their anger. 78.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥