Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.200.77: श्रोत्रिय ब्राह्मण हवि (यज्ञ) और कव्य (श्राद्ध) की सभी वस्तुओं का अधिकारी होता है। अच्छे श्रोत्रिय को दिया गया दान प्रज्वलित अग्नि में दी गई आहुति के समान फलदायी होता है। | mahabharat अध्याय 3.200: निन्दित दान, निन्दित जन्म, योग्य दानपात्र, श्राद्धमें ग्राह्य और अग्राह्य ब्राह्मण,दानपात्रके लक्षण, अतिथि-सत्कार, विविध दानोंका महत्त्व, वाणीकी शुद्धि, गायत्रीजप, चित्तशुद्धि तथा इन्द्रिय-निग्रह आदि विविध विषयोंका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हव्यं कव्यं च यत् किंचित् सर्वं तच्छ्रोत्रियोऽर्हति।
दत्तं हि श्रोत्रिये साधौ ज्वलितेऽग्नौ यथा हुतम्॥ ७७॥
अनुवाद
श्रोत्रिय ब्राह्मण हवि (यज्ञ) और कव्य (श्राद्ध) की सभी वस्तुओं का अधिकारी होता है। अच्छे श्रोत्रिय को दिया गया दान प्रज्वलित अग्नि में दी गई आहुति के समान फलदायी होता है।
A Shrotri Brahmin is entitled to all the items of Havi (sacrifice) and Kavya (Shraddha). The donation given to a good Shrotri is as successful as the offering made in a blazing fire.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥