Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.200.72-73: हे भारत! जो मनुष्य सोने के नासिका और सुन्दर चाँदी के खुरों से सुशोभित, सब प्रकार के रत्नों से सुसज्जित और तिलों से लिपटी हुई काली गाय का दान करता है और उस दान को लेकर किसी अन्य श्रेष्ठ पुरुष को देता है, वह उत्तम फल प्राप्त करता है॥ 72-73॥ | mahabharat अध्याय 3.200: निन्दित दान, निन्दित जन्म, योग्य दानपात्र, श्राद्धमें ग्राह्य और अग्राह्य ब्राह्मण,दानपात्रके लक्षण, अतिथि-सत्कार, विविध दानोंका महत्त्व, वाणीकी शुद्धि, गायत्रीजप, चित्तशुद्धि तथा इन्द्रिय-निग्रह आदि विविध विषयोंका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे भारत! जो मनुष्य सोने के नासिका और सुन्दर चाँदी के खुरों से सुशोभित, सब प्रकार के रत्नों से सुसज्जित और तिलों से लिपटी हुई काली गाय का दान करता है और उस दान को लेकर किसी अन्य श्रेष्ठ पुरुष को देता है, वह उत्तम फल प्राप्त करता है॥ 72-73॥
O Bharata! He who makes charity of a black cow adorned with a golden nose and beautiful silver hooves, decked with all kinds of precious stones, and covered with sesame seeds, and who takes that charity and offers it again to some other noble man, he attains the best reward. ॥ 72-73॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥