Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.200.63: अतः राजेन्द्र! तुम भी अतिथियों का सत्कार यथायोग्य करते रहो। यह बात मैं तुमसे अनेक बार कह चुका हूँ, अब और क्या सुनना चाहते हो?॥ 63॥ | mahabharat अध्याय 3.200: निन्दित दान, निन्दित जन्म, योग्य दानपात्र, श्राद्धमें ग्राह्य और अग्राह्य ब्राह्मण,दानपात्रके लक्षण, अतिथि-सत्कार, विविध दानोंका महत्त्व, वाणीकी शुद्धि, गायत्रीजप, चित्तशुद्धि तथा इन्द्रिय-निग्रह आदि विविध विषयोंका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अतः राजेन्द्र! तुम भी अतिथियों का सत्कार यथायोग्य करते रहो। यह बात मैं तुमसे अनेक बार कह चुका हूँ, अब और क्या सुनना चाहते हो?॥ 63॥
Therefore, Rajendra! You too should continue to welcome guests in a proper manner. I have told you this many times, what more do you want to hear!॥ 63॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥