Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.200.62: जब ऐसा अतिथि किसी के घर जाता है, तो इंद्र सहित सभी देवता भी उसके पीछे-पीछे वहाँ चले आते हैं। यदि उस अतिथि का वहाँ आदर-सत्कार किया जाए, तो वे देवता भी प्रसन्न होते हैं और यदि उसका आदर-सत्कार न किया जाए, तो वे देवता भी निराश होकर लौट जाते हैं। 62. | mahabharat अध्याय 3.200: निन्दित दान, निन्दित जन्म, योग्य दानपात्र, श्राद्धमें ग्राह्य और अग्राह्य ब्राह्मण,दानपात्रके लक्षण, अतिथि-सत्कार, विविध दानोंका महत्त्व, वाणीकी शुद्धि, गायत्रीजप, चित्तशुद्धि तथा इन्द्रिय-निग्रह आदि विविध विषयोंका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब ऐसा अतिथि किसी के घर जाता है, तो इंद्र सहित सभी देवता भी उसके पीछे-पीछे वहाँ चले आते हैं। यदि उस अतिथि का वहाँ आदर-सत्कार किया जाए, तो वे देवता भी प्रसन्न होते हैं और यदि उसका आदर-सत्कार न किया जाए, तो वे देवता भी निराश होकर लौट जाते हैं। 62.
When such a guest visits someone's house, then all the gods including Indra also follow him there. If that guest is respected there, then even those gods are pleased and if he is not respected, then even those gods return disappointed. 62.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥