Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.200.6: जो वानप्रस्थ या संन्यास आश्रम से गृहस्थ आश्रम में लौट आया है, उसे 'आरुधा-पतित' कहते हैं। उसे दिया गया दान व्यर्थ है। अन्याय से अर्जित धन का दान भी व्यर्थ है। पतित ब्राह्मण या चोर को दिया गया दान भी व्यर्थ है।॥6॥ | mahabharat अध्याय 3.200: निन्दित दान, निन्दित जन्म, योग्य दानपात्र, श्राद्धमें ग्राह्य और अग्राह्य ब्राह्मण,दानपात्रके लक्षण, अतिथि-सत्कार, विविध दानोंका महत्त्व, वाणीकी शुद्धि, गायत्रीजप, चित्तशुद्धि तथा इन्द्रिय-निग्रह आदि विविध विषयोंका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो वानप्रस्थ या संन्यास आश्रम से गृहस्थ आश्रम में लौट आया है, उसे 'आरुधा-पतित' कहते हैं। उसे दिया गया दान व्यर्थ है। अन्याय से अर्जित धन का दान भी व्यर्थ है। पतित ब्राह्मण या चोर को दिया गया दान भी व्यर्थ है।॥6॥
One who has returned to the Grahastha Ashram from the Vanaprastha or Sanyas Ashram is called 'Aarudha-Patit'. Donation given to him is useless. Donation of money earned through injustice is also useless. Donation given to a fallen Brahmin or a thief is also useless.॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥