Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.200.56-57h: जो मनुष्य छठी रात्रि तक उपवास करते हैं, वे मोरों द्वारा खींचे जाने वाले विमानों में यात्रा करते हैं। हे पाण्डुपुत्र! जो एक बार भोजन करके तीन रातें उसी में बिताते हैं और बीच में कुछ नहीं खाते, वे रोगों और शोकों से रहित पुण्य लोक को प्राप्त होते हैं। | mahabharat अध्याय 3.200: निन्दित दान, निन्दित जन्म, योग्य दानपात्र, श्राद्धमें ग्राह्य और अग्राह्य ब्राह्मण,दानपात्रके लक्षण, अतिथि-सत्कार, विविध दानोंका महत्त्व, वाणीकी शुद्धि, गायत्रीजप, चित्तशुद्धि तथा इन्द्रिय-निग्रह आदि विविध विषयोंका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो मनुष्य छठी रात्रि तक उपवास करते हैं, वे मोरों द्वारा खींचे जाने वाले विमानों में यात्रा करते हैं। हे पाण्डुपुत्र! जो एक बार भोजन करके तीन रातें उसी में बिताते हैं और बीच में कुछ नहीं खाते, वे रोगों और शोकों से रहित पुण्य लोक को प्राप्त होते हैं।
Those who fast till the sixth night travel in planes drawn by peacocks. O son of Pandu! Those who eat a single meal and spend three nights on it and do not eat in between, attain the virtuous world, which is free from diseases and sorrows. 56 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥