Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.200.51: जो अन्नदान करते हैं, वे अन्न से तृप्त होकर जाते हैं; परन्तु जो अन्नदान नहीं करते, वे भूख से पीड़ित होकर जाते हैं। जो वस्त्रदान करते हैं, वे वस्त्र पहनकर जाते हैं और जो वस्त्रदान नहीं करते, उन्हें नग्न होकर जाना पड़ता है॥ 51॥ | mahabharat अध्याय 3.200: निन्दित दान, निन्दित जन्म, योग्य दानपात्र, श्राद्धमें ग्राह्य और अग्राह्य ब्राह्मण,दानपात्रके लक्षण, अतिथि-सत्कार, विविध दानोंका महत्त्व, वाणीकी शुद्धि, गायत्रीजप, चित्तशुद्धि तथा इन्द्रिय-निग्रह आदि विविध विषयोंका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो अन्नदान करते हैं, वे अन्न से तृप्त होकर जाते हैं; परन्तु जो अन्नदान नहीं करते, वे भूख से पीड़ित होकर जाते हैं। जो वस्त्रदान करते हैं, वे वस्त्र पहनकर जाते हैं और जो वस्त्रदान नहीं करते, उन्हें नग्न होकर जाना पड़ता है॥ 51॥
Those who donate food, go there satiated with the food; but those who have not donated food, go while suffering from hunger. Those who donate clothes, go wearing clothes and those who have not donated clothes, have to go naked.॥ 51॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥