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mahabharat 3.200.49-50: हे राजन! जिन लोगों ने यहाँ ब्राह्मणों को नाना प्रकार के घोड़े आदि उत्तम प्रकार के वाहन दान किए हैं, वे उस मार्ग से (उन वाहनों पर सुखपूर्वक) यात्रा करते हैं। जिन लोगों ने छाते दान किए हैं, वे वहाँ प्राप्त छातों के द्वारा गर्मी से बचते हुए चलते हैं।   |   mahabharat अध्याय 3.200: निन्दित दान, निन्दित जन्म, योग्य दानपात्र, श्राद्धमें ग्राह्य और अग्राह्य ब्राह्मण,दानपात्रके लक्षण, अतिथि-सत्कार, विविध दानोंका महत्त्व, वाणीकी शुद्धि, गायत्रीजप, चित्तशुद्धि तथा इन्द्रिय-निग्रह आदि विविध विषयोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 200: निन्दित दान, निन्दित जन्म, योग्य दानपात्र, श्राद्धमें ग्राह्य और अग्राह्य ब्राह्मण,दानपात्रके लक्षण, अतिथि-सत्कार, विविध दानोंका महत्त्व, वाणीकी शुद्धि, गायत्रीजप, चित्तशुद्धि तथा इन्द्रिय-निग्रह आदि विविध विषयोंका वर्णन  »  श्लोक 49-50
 
 
श्लोक  3.200.49-50 
ब्राह्मणेभ्य: प्रदानानि नानारूपाणि पार्थिव॥ ४९॥
हयादीनां प्रकृष्टानि तेऽध्वानं यान्ति वै नरा:।
संनिवार्यातपं यान्ति छत्रेणैव हि छत्रदा:॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! जिन लोगों ने यहाँ ब्राह्मणों को नाना प्रकार के घोड़े आदि उत्तम प्रकार के वाहन दान किए हैं, वे उस मार्ग से (उन वाहनों पर सुखपूर्वक) यात्रा करते हैं। जिन लोगों ने छाते दान किए हैं, वे वहाँ प्राप्त छातों के द्वारा गर्मी से बचते हुए चलते हैं।
 
O King! Those who have made excellent donations of various types of horses and other vehicles to the Brahmins here, travel on that road (comfortably on those vehicles). People who have made donations of umbrellas, walk while warding off the heat by means of the umbrellas they receive there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)