एकस्यैका प्रदातव्या न बहूनां कदाचन।
सा गौर्विक्रयमापन्ना हन्यात् त्रिपुरुषं कुलम्॥ २९॥
न तारयति दातारं ब्राह्मणं नैव नैव तु।
अनुवाद
एक गाय केवल एक ही ब्राह्मण को दान करनी चाहिए, अनेक को नहीं (क्योंकि यदि एक गाय अनेकों को दे दी जाए, तो वे उसे बेचकर उसका मूल्य आपस में बाँट लेंगे)। दान की गई गाय यदि बेच दी जाए, तो वह दानकर्ता की तीन पीढ़ियों को हानि पहुँचाती है। इससे न तो दानकर्ता का और न ही ब्राह्मण का कोई हित होता है।॥29 1/2॥
A cow should be donated to only one brahmin; never to many (because if one cow is given to many, they will sell it and divide its price). If a cow donated is sold, it harms three generations of the donor. It neither helps the donor nor the brahmin.॥ 29 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)