Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.200.19: तथापि, वे सभी ब्राह्मण, जो श्राद्ध करने के लिए निषिद्ध हैं, जैसे अंधे, गूंगे, बहरे आदि, वेदों में पारंगत ब्राह्मणों के साथ श्राद्ध में सम्मिलित किए जा सकते हैं।॥19॥ | mahabharat अध्याय 3.200: निन्दित दान, निन्दित जन्म, योग्य दानपात्र, श्राद्धमें ग्राह्य और अग्राह्य ब्राह्मण,दानपात्रके लक्षण, अतिथि-सत्कार, विविध दानोंका महत्त्व, वाणीकी शुद्धि, गायत्रीजप, चित्तशुद्धि तथा इन्द्रिय-निग्रह आदि विविध विषयोंका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ये ये श्राद्धे न युज्यन्ते मूकान्धबधिरादय:।
तेऽपि सर्वे नियोक्तव्या मिश्रिता वेदपारगै:॥ १९॥
अनुवाद
तथापि, वे सभी ब्राह्मण, जो श्राद्ध करने के लिए निषिद्ध हैं, जैसे अंधे, गूंगे, बहरे आदि, वेदों में पारंगत ब्राह्मणों के साथ श्राद्ध में सम्मिलित किए जा सकते हैं।॥19॥
However, all those Brahmins who are prohibited from performing Shraddha, such as the blind, the dumb, the deaf etc., can be included in the Shraddha along with the Brahmins well versed in the Vedas.॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥