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mahabharat 3.200.14: जो ब्राह्मणों को संतुष्ट करता है, उस पर सभी देवता प्रसन्न होते हैं। ब्राह्मणों के वचनों से अर्थात् उनके आशीर्वाद से मनुष्य स्वर्ग को प्राप्त कर सकता है॥14॥   |   mahabharat अध्याय 3.200: निन्दित दान, निन्दित जन्म, योग्य दानपात्र, श्राद्धमें ग्राह्य और अग्राह्य ब्राह्मण,दानपात्रके लक्षण, अतिथि-सत्कार, विविध दानोंका महत्त्व, वाणीकी शुद्धि, गायत्रीजप, चित्तशुद्धि तथा इन्द्रिय-निग्रह आदि विविध विषयोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 200: निन्दित दान, निन्दित जन्म, योग्य दानपात्र, श्राद्धमें ग्राह्य और अग्राह्य ब्राह्मण,दानपात्रके लक्षण, अतिथि-सत्कार, विविध दानोंका महत्त्व, वाणीकी शुद्धि, गायत्रीजप, चित्तशुद्धि तथा इन्द्रिय-निग्रह आदि विविध विषयोंका वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.200.14 
ब्राह्मणांस्तोषयेद् यस्तु तुष्यन्ते तस्य देवता:।
वचनाच्चापि विप्राणां स्वर्गलोकमवाप्नुयात्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जो ब्राह्मणों को संतुष्ट करता है, उस पर सभी देवता प्रसन्न होते हैं। ब्राह्मणों के वचनों से अर्थात् उनके आशीर्वाद से मनुष्य स्वर्ग को प्राप्त कर सकता है॥14॥
 
All the gods are pleased with the one who satisfies the brahmins. A man can attain heaven by the words of the brahmins i.e. by their blessings.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)