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mahabharat 3.200.127: हे राजन! जिसने भूमि का दान नहीं किया है, वह परलोक में पृथ्वी का उपभोग नहीं कर सकता। जिसने वाहन का दान नहीं किया है, वह वाहन से नहीं जा सकता। मनुष्य इस जीवन में ब्राह्मणों को जो कुछ दान करता है, वह उसे अगले जन्म में उपयोग के लिए प्राप्त होता है। 127।   |   mahabharat अध्याय 3.200: निन्दित दान, निन्दित जन्म, योग्य दानपात्र, श्राद्धमें ग्राह्य और अग्राह्य ब्राह्मण,दानपात्रके लक्षण, अतिथि-सत्कार, विविध दानोंका महत्त्व, वाणीकी शुद्धि, गायत्रीजप, चित्तशुद्धि तथा इन्द्रिय-निग्रह आदि विविध विषयोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 200: निन्दित दान, निन्दित जन्म, योग्य दानपात्र, श्राद्धमें ग्राह्य और अग्राह्य ब्राह्मण,दानपात्रके लक्षण, अतिथि-सत्कार, विविध दानोंका महत्त्व, वाणीकी शुद्धि, गायत्रीजप, चित्तशुद्धि तथा इन्द्रिय-निग्रह आदि विविध विषयोंका वर्णन  »  श्लोक 127
 
 
श्लोक  3.200.127 
नाभूमिदो भूमिमश्नाति राजन्
नायानदो यानमारुह्य याति।
यान् यान् कामान् ब्राह्मणेभ्यो ददाति
तांस्तान् कामान् जायमान: स भुङ्‍‍क्ते॥ १२७॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! जिसने भूमि का दान नहीं किया है, वह परलोक में पृथ्वी का उपभोग नहीं कर सकता। जिसने वाहन का दान नहीं किया है, वह वाहन से नहीं जा सकता। मनुष्य इस जीवन में ब्राह्मणों को जो कुछ दान करता है, वह उसे अगले जन्म में उपयोग के लिए प्राप्त होता है। 127।
 
O King! One who has not donated land cannot enjoy the earth in the next world. One who has not donated a vehicle cannot go by vehicle. Whatever things a man donates to Brahmins in this life, he gets those things for use in his next life. 127.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)