Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.200.122: जो मनुष्य अपनी जीविका के लिए पका हुआ अन्न दान करता है, वह स्वर्ग में स्थान पाता है। जो मनुष्य किसी यात्री या अतिथि को आश्रय देता है, वह सभी यज्ञों का अनुष्ठान पूर्ण कर लेता है। | mahabharat अध्याय 3.200: निन्दित दान, निन्दित जन्म, योग्य दानपात्र, श्राद्धमें ग्राह्य और अग्राह्य ब्राह्मण,दानपात्रके लक्षण, अतिथि-सत्कार, विविध दानोंका महत्त्व, वाणीकी शुद्धि, गायत्रीजप, चित्तशुद्धि तथा इन्द्रिय-निग्रह आदि विविध विषयोंका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो मनुष्य अपनी जीविका के लिए पका हुआ अन्न दान करता है, वह स्वर्ग में स्थान पाता है। जो मनुष्य किसी यात्री या अतिथि को आश्रय देता है, वह सभी यज्ञों का अनुष्ठान पूर्ण कर लेता है।
He who donates cooked food for his livelihood attains a place in heaven. He who gives shelter to a traveller or guest, completes the ritual of all the sacrifices.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥