Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.200.121: श्रुतियों और स्मृतियों में वर्णित दान के रहस्यों का वर्णन सुनो। युधिष्ठिर! अमावस्या के दिन गुरुवार को पीपल के वृक्ष की छाया को गजच्छाया पर्व कहते हैं। गजच्छाया के समय जिस क्षेत्र में पीपल के पत्ते हवा से उड़ते हैं, वहाँ जल के निकट किया गया श्राद्ध एक लाख कल्पों तक नष्ट नहीं होता।   |   mahabharat अध्याय 3.200: निन्दित दान, निन्दित जन्म, योग्य दानपात्र, श्राद्धमें ग्राह्य और अग्राह्य ब्राह्मण,दानपात्रके लक्षण, अतिथि-सत्कार, विविध दानोंका महत्त्व, वाणीकी शुद्धि, गायत्रीजप, चित्तशुद्धि तथा इन्द्रिय-निग्रह आदि विविध विषयोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 200: निन्दित दान, निन्दित जन्म, योग्य दानपात्र, श्राद्धमें ग्राह्य और अग्राह्य ब्राह्मण,दानपात्रके लक्षण, अतिथि-सत्कार, विविध दानोंका महत्त्व, वाणीकी शुद्धि, गायत्रीजप, चित्तशुद्धि तथा इन्द्रिय-निग्रह आदि विविध विषयोंका वर्णन  »  श्लोक 121
 
 
श्लोक  3.200.121 
शृणु दानरहस्यानि श्रुतिस्मृत्युदितानि च।
छायायां करिण: श्राद्धं तत् कर्णपरिवीजिते।
दश कल्पायुतानीह न क्षीयेत युधिष्ठिर॥ १२१॥
 
 
अनुवाद
श्रुतियों और स्मृतियों में वर्णित दान के रहस्यों का वर्णन सुनो। युधिष्ठिर! अमावस्या के दिन गुरुवार को पीपल के वृक्ष की छाया को गजच्छाया पर्व कहते हैं। गजच्छाया के समय जिस क्षेत्र में पीपल के पत्ते हवा से उड़ते हैं, वहाँ जल के निकट किया गया श्राद्ध एक लाख कल्पों तक नष्ट नहीं होता।
 
Listen to the description of the secrets of charity which have been mentioned in the Shrutis and Smritis. Yudhishthira! The shadow of the Peepal tree on Thursday during Amavasya is called Gajachhaaya festival. The Shraddha performed near water in the region where the Peepal leaves are blown by the wind during Gajachhaaya does not get destroyed for a lakh of Kalpas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)