Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.20.41: हे कुन्तीपुत्र! फिर उस अस्त्र ने उस सम्पूर्ण माया को उसी प्रकार उड़ा दिया, जैसे वायु रुई को उड़ा देती है। इसके बाद हमारे और शाल्व के बीच अत्यन्त भयंकर और रोमांचकारी युद्ध आरम्भ हो गया। हे राजन! जब चारों ओर प्रकाश हो गया, तब मैं पुनः शत्रुओं के साथ युद्ध करने लगा॥ 41॥ | mahabharat अध्याय 3.20: श्रीकृष्ण और शाल्वका भीषण युद्ध । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे कुन्तीपुत्र! फिर उस अस्त्र ने उस सम्पूर्ण माया को उसी प्रकार उड़ा दिया, जैसे वायु रुई को उड़ा देती है। इसके बाद हमारे और शाल्व के बीच अत्यन्त भयंकर और रोमांचकारी युद्ध आरम्भ हो गया। हे राजन! जब चारों ओर प्रकाश हो गया, तब मैं पुनः शत्रुओं के साथ युद्ध करने लगा॥ 41॥
O son of Kunti! Then that weapon blew away all that illusion in the same way as the wind blows away cotton. After this, a very fierce and thrilling battle began between us and Shalva. O King! When there was light all around, I again started fighting with the enemy. ॥ 41॥
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि अर्जुनाभिगमनपर्वणि सौभवधोपाख्याने विंशोऽध्याय:॥ २०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत अर्जुनाभिगमनपर्वमें सौभवधोपाख्यानविषयक बीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २०॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥