Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.20.36-37: तत्पश्चात्, कभी अन्धकार हो जाता, कभी उजाला हो जाता, कभी आकाश बादलों से आच्छादित हो जाता और कभी बादलों के छँट जाने पर सुन्दर दिन प्रकट हो जाता। कभी शीत हो जाती, कभी गर्मी। अंगारों और धूल की वर्षा के साथ-साथ अस्त्र-शस्त्रों की भी वर्षा होने लगती। इस प्रकार शत्रु ने माया का प्रयोग करके मुझसे युद्ध आरम्भ कर दिया। 36-37 | mahabharat अध्याय 3.20: श्रीकृष्ण और शाल्वका भीषण युद्ध । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ततोऽभवत् तम इव प्रकाश इव चाभवत्।
दुर्दिनं सुदिनं चैव शीतमुष्णं च भारत॥ ३६॥
अङ्गारपांशुवर्षं च शस्त्रवर्षं च भारत।
एवं मायां प्रकुर्वाणो योधयामास मां रिपु:॥ ३७॥
अनुवाद
तत्पश्चात्, कभी अन्धकार हो जाता, कभी उजाला हो जाता, कभी आकाश बादलों से आच्छादित हो जाता और कभी बादलों के छँट जाने पर सुन्दर दिन प्रकट हो जाता। कभी शीत हो जाती, कभी गर्मी। अंगारों और धूल की वर्षा के साथ-साथ अस्त्र-शस्त्रों की भी वर्षा होने लगती। इस प्रकार शत्रु ने माया का प्रयोग करके मुझसे युद्ध आरम्भ कर दिया। 36-37
Thereafter, sometimes it would become dark, sometimes it would become light, sometimes the sky would be covered with clouds and sometimes a beautiful day would appear after the clouds would disperse. Sometimes it would become cold and sometimes hot. Along with the rain of embers and dust, there would also be a shower of weapons. In this way the enemy started a war with me using Maya. 36-37.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥