श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 20: श्रीकृष्ण और शाल्वका भीषण युद्ध  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.20.24 
न हया न रथो वीर न यन्ता मम दारुक:।
अदृश्यन्त शरैश्छन्नास्तथाहं सैनिकाश्च मे॥ २४॥
 
 
अनुवाद
हे वीर! उस समय मेरे घोड़े, रथ, सारथि दारुक, मैं तथा मेरे समस्त सैनिक बाणों से आच्छादित होकर अदृश्य हो गए।
 
O brave one! At that time my horses, chariot, my charioteer Daruk, I and all my soldiers - all were covered with arrows and became invisible. 24.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)