Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.2.69: तत्पश्चात् संकल्परूपी बीजरूप काम के द्वारा विषय-भोगों के बाणों से बिंधकर, प्रकाश से मोहित हुआ मनुष्य पतंग के समान लोभरूपी अग्नि में गिर पड़ता है ॥69॥   |   mahabharat अध्याय 3.2: धनके दोष, अतिथिसत्कारकी महत्ता तथा कल्याणके उपायोंके विषयमें धर्मराज युधिष्ठिरसे ब्राह्मणों तथा शौनकजीकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 2: धनके दोष, अतिथिसत्कारकी महत्ता तथा कल्याणके उपायोंके विषयमें धर्मराज युधिष्ठिरसे ब्राह्मणों तथा शौनकजीकी बातचीत  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  3.2.69 
तत: संकल्पबीजेन कामेन विषयेषुभि:।
विद्ध: पतति लोभाग्नौ ज्योतिर्लोभात् पतङ्गवत्॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् संकल्परूपी बीजरूप काम के द्वारा विषय-भोगों के बाणों से बिंधकर, प्रकाश से मोहित हुआ मनुष्य पतंग के समान लोभरूपी अग्नि में गिर पड़ता है ॥69॥
 
Thereafter, pierced by the arrows of sensual pleasures through desire, whose seed is resolution, man, lured by the light, falls into the fire of greed like a kite. ॥ 69॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)