एवं यो वर्तते वृत्तिं वर्तमानो गृहाश्रमे।
तस्य धर्मं परं प्राहु: कथं वा विप्र मन्यसे॥ ६३॥
अनुवाद
हे ब्रह्मन्! इस प्रकार रहने वाले गृहस्थ के लिए उत्तम धर्म की प्राप्ति बताई गई है। अथवा इस विषय में तुम्हारा क्या मत है? ॥63॥
O Brahman! For a householder who lives in this way, it has been said that he will attain the best religion. Or what is your opinion on this matter? ॥ 63॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)