श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 2: धनके दोष, अतिथिसत्कारकी महत्ता तथा कल्याणके उपायोंके विषयमें धर्मराज युधिष्ठिरसे ब्राह्मणों तथा शौनकजीकी बातचीत  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  3.2.60 
विघसाशी भवेत् तस्मान्नित्यं चामृतभोजन:।
विघसो भुक्तशेषं तु यज्ञशेषं तथामृतम्॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
अतः गृहस्थ को प्रतिदिन विघास और अमृत का सेवन करना चाहिए। घर में सभी के भोजन करने के बाद जो भोजन बचता है, उसे विघास कहते हैं और बलिवैश्वदेव के भोजन से जो भोजन बचता है, उसे अमृत कहते हैं।
 
Therefore, a householder should eat Vighas and Amrit every day. The food that remains after everyone in the house has eaten is called 'Vighas' and the food left over from Balivaishwadeva is called 'Amrit'. 60.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)