श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 2: धनके दोष, अतिथिसत्कारकी महत्ता तथा कल्याणके उपायोंके विषयमें धर्मराज युधिष्ठिरसे ब्राह्मणों तथा शौनकजीकी बातचीत  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.2.6 
अनुकम्पां हि भक्तेषु देवता ह्यपि कुर्वते।
विशेषतो ब्राह्मणेषु सदाचारावलम्बिषु॥ ६॥
 
 
अनुवाद
देवता भी अपने भक्तों पर, विशेषतः पुण्यात्मा ब्राह्मणों पर, निश्चय ही दया करते हैं ॥6॥
 
Even the gods certainly show mercy to their devotees, especially to the virtuous Brahmins. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)