अर्थ एव हि केषांचिदनर्थं भजते नृणाम्।
अर्थश्रेयसि चासक्तो न श्रेयो विन्दते नर:॥ ४१॥
अनुवाद
'बहुत से लोगों के लिए धन ही अनर्थ का कारण बन जाता है; क्योंकि धन से प्राप्त होने वाले लाभ (सांसारिक सुखों) में आसक्त मनुष्य वास्तविक कल्याण को प्राप्त नहीं होता॥ 41॥
'For many people money itself becomes the cause of disaster; because a person attached to the benefits (worldly pleasures) achieved through money does not achieve real welfare.॥ 41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥