Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.2.40: 'जैसे मांस का टुकड़ा आकाश में पक्षी, पृथ्वी पर पशु और जल में मछलियाँ खा जाते हैं, उसी प्रकार धनवान मनुष्य को सब जगह सब लोग खा जाते हैं ॥40॥ | mahabharat अध्याय 3.2: धनके दोष, अतिथिसत्कारकी महत्ता तथा कल्याणके उपायोंके विषयमें धर्मराज युधिष्ठिरसे ब्राह्मणों तथा शौनकजीकी बातचीत । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यथा ह्यामिषमाकाशे पक्षिभि: श्वापदैर्भुवि।
भक्ष्यते सलिले मत्स्यैस्तथा सर्वत्र वित्तवान्॥ ४०॥
अनुवाद
'जैसे मांस का टुकड़ा आकाश में पक्षी, पृथ्वी पर पशु और जल में मछलियाँ खा जाते हैं, उसी प्रकार धनवान मनुष्य को सब जगह सब लोग खा जाते हैं ॥40॥
'Just as a piece of meat is eaten by the birds in the sky, the beasts on the earth and the fishes in the water, in the same way a rich man is eaten up by everyone everywhere. 40॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥