Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.2.25: क्योंकि जब मन दुःखी होता है, तब शरीर भी व्याकुल होने लगता है; जैसे बर्तन में रखा हुआ ठण्डा पानी, गरम लोहे का गोला डालने पर गरम हो जाता है।॥25॥ | mahabharat अध्याय 3.2: धनके दोष, अतिथिसत्कारकी महत्ता तथा कल्याणके उपायोंके विषयमें धर्मराज युधिष्ठिरसे ब्राह्मणों तथा शौनकजीकी बातचीत । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मानसेन हि दु:खेन शरीरमुपतप्यते।
अय:पिण्डेन तप्तेन कुम्भसंस्थमिवोदकम्॥ २५॥
अनुवाद
क्योंकि जब मन दुःखी होता है, तब शरीर भी व्याकुल होने लगता है; जैसे बर्तन में रखा हुआ ठण्डा पानी, गरम लोहे का गोला डालने पर गरम हो जाता है।॥25॥
‘Because when the mind is sad, the body also starts feeling agitated; just like cold water kept in a pot becomes hot when a heated iron ball is put into it.॥ 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥