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श्लोक  3.2.20 
श्रूयतां चाभिधास्यामि जनकेन यथा पुरा।
आत्मव्यवस्थानकरा गीता: श्लोका महात्मना॥ २०॥
 
 
अनुवाद
पूर्वकाल में महाराज जनक ने अन्तःकरण को स्थिर करने वाले कुछ श्लोक गाये थे। मैं उन श्लोकों का वर्णन कर रहा हूँ, कृपया उन्हें सुनें।
 
‘In the past, the great king Janaka had sung some verses that stabilized the conscience. I am describing those verses, please listen to them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)