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श्लोक 3.199.d2  |
| (तं पुन: प्रत्यब्रवम्) अस्ति खलु हिमवति प्रावारकर्णो नामोलूक: प्रतिवसति। स मत्तश्चिरजातो भवन्तं यदि जानीयादित: प्रकृष्टे चाध्वनि हिमवांस्तत्रासौ प्रतिवसतीति॥ ४॥ |
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| अनुवाद |
| तब मैंने उसे पुनः उत्तर दिया - 'प्रवरकर्ण नामक एक उल्लू हिमालय पर्वत पर रहता है। वह मुझसे पहले उत्पन्न हुआ था। हो सकता है कि वह तुम्हें जानता हो। यदि तुम यहाँ से बहुत दूर जाओगे, तो तुम्हें हिमालय पर्वत मिलेगा। वह वहीं रहता है।'॥4॥ |
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| ‘Then I replied to him again – ‘An owl known as Pravarakarna lives on the Himalaya Mountain. He was born before me. It is possible that he knows you. If you travel a long distance from here, you will find the Himalaya Mountain. He lives there.’॥ 4॥ |
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