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श्लोक 3.199.9  |
| तत: स बकस्तमकूपारं कच्छपं विज्ञापयामास। अस्माकमभिप्रेतं भवन्तं किञ्चिदर्थमभिप्रष्टुं साध्वागम्यतां तावदिति तच्छ्रुत्वा कच्छपस्तस्मात् सरस उत्थायाभ्यगच्छद् यत्र तिष्ठामो वयं तस्य सरसस्तीरे आगतं चैनं वयमपृच्छाम भवानिन्द्रद्युम्नं राजानमभिजानातीति॥ ९॥ |
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| अनुवाद |
| तब उस हिरन ने अकुपार नामक कछुए से कहा कि 'हम आपसे कुछ मनचाहा प्रश्न पूछना चाहते हैं। कृपया आइए।' यह संदेश सुनकर वह कछुआ उस सरोवर से बाहर आया, जहाँ हम किनारे पर खड़े थे। आते ही हमने उससे पूछा - 'क्या तुम राजा इन्द्रद्युम्न को जानते हो?'॥9॥ |
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| ‘Then that buck informed the tortoise named Akupara that ‘We want to ask you some desired questions. Please come.’ On hearing this message, that tortoise came out of the lake where we were standing on the bank. On coming, we asked him – ‘Do you know King Indradyumna?’॥9॥ |
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