श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 199: राजा इन्द्रद्युम्न तथा अन्य चिरजीवी प्राणियोंकी कथा  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.199.8 
सोऽस्माभि: पृष्टो भवानिममिन्द्रद्युम्नं राजानमभिजानातीति स एवं मुहूर्तं ध्यात्वाब्रवीन्ना-भिजानाम्यहमिद्रद्युम्नं राजानमिति। तत: सोऽस्माभि: पृष्ट: कश्चिद् भवतोऽन्यश्चिरजाततरोऽस्तीति। स नोऽब्रवीदस्ति खल्वस्मिन्नेव सरस्यकूपारो नाम कच्छप: प्रतिवसति। स मत्तश्चिरजाततर:। स यदि कथंचिदभिजानीयादिमं राजानं तमकूपारं पृच्छध्वमिति॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हमने कौवे से पूछा, 'क्या तुम राजा इंद्रद्युम्न को जानते हो?' उसने कुछ देर सोचा और कहा, 'मैं राजा इंद्रद्युम्न को नहीं जानता।' फिर हमने उससे पूछा, 'क्या कोई और प्राणी है जो तुमसे पहले पैदा हुआ था?' उसने बताया, 'हाँ, इस झील में अकूपर नाम का एक कछुआ रहता है। वह मुझसे पहले पैदा हुआ था। तुम सब अकूपर से पूछो। हो सकता है कि वह किसी न किसी तरह इस राजा को जानता हो।'
 
We asked the crow, 'Do you know King Indradyumna?' He thought for a while and replied, 'I do not know King Indradyumna.' Then we asked him, 'Is there any other creature who was born before you?' He told us, 'Yes, a tortoise named Akupar lives in this lake. He was born before me. You all should ask Akupar. It is possible that he knows this king in some way.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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