|
| |
| |
श्लोक 3.199.6  |
| स मुहूर्तमिव ध्यात्वाब्रवीदेनं नाभिजानामि भवन्तमिति स एवमुक्त इन्द्रद्युम्न: पुनस्तमुलूकमब्रवीद् राजर्षि:॥ ६॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| ‘कुछ देर तक विचार करने के बाद उसने उससे कहा - ‘मैं तुम्हें नहीं जानता।’ उल्लू की यह बात सुनकर राजा इन्द्रद्युम्न ने उससे पुनः पूछा -॥6॥ |
| |
| ‘After thinking for a while he said to him - 'I do not know you.' On hearing Owl say this, King Indradyumna asked him again -॥ 6॥ |
| ✨ ai-generated |
| |
|