श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 199: राजा इन्द्रद्युम्न तथा अन्य चिरजीवी प्राणियोंकी कथा  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.199.18 
पाण्डवाश्चोचु: साधु शोभनं भवता कृतं राजानमिन्द्रद्युम्नं स्वर्गलोकाच्च्युतं स्वे स्थाने प्रतिपादयतेत्यथैतानब्रवीदसौ ननु देवकीपुत्रेणापि कृष्णेन नरके मज्जमानो राजर्षिर्नृगस्तस्मात् कृच्छ्रात् पुन: समुद्‍धृत्य स्वर्गं प्रापित इति॥ १८॥
 
 
अनुवाद
पाण्डवों ने कहा, "आपने स्वर्ग से निकाले गए राजा इन्द्रद्युम्न को पुनः अपना स्थान दिलाने में बड़ा पुण्य किया है।" तब मार्कण्डेयजी ने उनसे कहा, "देवपुत्र भगवान श्रीकृष्ण ने भी नरक में डूबते हुए राजा नृग को उस महान संकट से बचाकर स्वर्ग वापस भेज दिया था।" ॥18॥
 
The Pandavas said, "You have done a great deed by helping King Indradyumna, who had been thrown out of heaven, regain his place." Then Markandeya said to them, "The son of the Gods, Lord Krishna, also rescued King Nriga from that great danger while he was drowning in hell and sent him back to heaven." ॥18॥
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि मार्कण्डेयसमास्यापर्वणि इन्द्रद्युम्नोपाख्याने नवनवत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १९९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत मार्कण्डेयसमास्यापर्वमें इन्द्रद्युम्नोपाख्यानविषयक

एक सौ निन्यानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १९९॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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