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mahabharat 3.199.12: कच्छप के मुख से ये सब वचन सुनकर स्वर्ग से एक दिव्य रथ प्रकट हुआ और उसमें से इन्द्रद्युम्न से कुछ वचन कहे गए - 'हे राजन! तुम्हारे लिए स्वर्ग उपलब्ध है। वहाँ जाओ और उचित स्थान ग्रहण करो। तुम यशस्वी हो। अतः निश्चिन्त होकर स्वर्ग की यात्रा करो।'॥12॥   |   mahabharat अध्याय 3.199: राजा इन्द्रद्युम्न तथा अन्य चिरजीवी प्राणियोंकी कथा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 199: राजा इन्द्रद्युम्न तथा अन्य चिरजीवी प्राणियोंकी कथा  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.199.12 
अथैतत् सकलं कच्छपेनोदाहृतं श्रुत्वा तदनन्तरं देवलोकाद् देवरथ: प्रादुरासीद् वाचश्चाश्रूयन्तेन्द्रद्युम्नं प्रति प्रस्तुतस्ते स्वर्गो यथोचितं स्थानं प्रतिपद्यस्व कीर्तिमानस्यव्यग्रो याहीति॥ १२॥
 
 
अनुवाद
कच्छप के मुख से ये सब वचन सुनकर स्वर्ग से एक दिव्य रथ प्रकट हुआ और उसमें से इन्द्रद्युम्न से कुछ वचन कहे गए - 'हे राजन! तुम्हारे लिए स्वर्ग उपलब्ध है। वहाँ जाओ और उचित स्थान ग्रहण करो। तुम यशस्वी हो। अतः निश्चिन्त होकर स्वर्ग की यात्रा करो।'॥12॥
 
‘After listening to all these words from the mouth of Kachhapa, a divine chariot appeared from the heaven and from it some words were said to Indradyumna - 'O King! Heaven is available for you. Go there and take the appropriate place. You are famous. Therefore, travel to heaven without any worry.'॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)