श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 199: राजा इन्द्रद्युम्न तथा अन्य चिरजीवी प्राणियोंकी कथा  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.199.11 
सरश्चेदमस्य दक्षिणाभिर्दत्ताभिर्गोभिरतिक्रममाणाभि: कृतम्। अत्र चाहं प्रतिवसामीति॥ ११॥
 
 
अनुवाद
"उनके द्वारा दक्षिणा स्वरूप दी गई गौओं के आने-जाने से वह सरोवर निर्मित हुआ है, जिसमें मैं निवास करता हूँ।" ॥11॥
 
"The coming and going of the cows given as dakshina by them has formed the lake in which I reside." ॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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