Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.199.10: कुछ देर ध्यान करने के बाद, नेत्रों में आँसू और व्याकुल हृदय से, काँपती हुई अवस्था में हाथ जोड़कर उसने कहा - 'मैं उसे क्यों न पहचानूँ? उसने अग्नि स्थापना के समय एक हजार बार यज्ञ की स्थापना की है॥ 10॥ | mahabharat अध्याय 3.199: राजा इन्द्रद्युम्न तथा अन्य चिरजीवी प्राणियोंकी कथा । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स मुहूर्तं ध्यात्वा बाष्पसम्पूर्णनयन उद्विग्नहृदयो वेपमानो विसंज्ञकल्प: प्राञ्जलिरब्रवीत्। किमहमेनं न प्रत्यभिज्ञास्यामीह ह्यनेन सहस्रकृत्वश्चितिषु यूपा आहिता:॥ १०॥
अनुवाद
कुछ देर ध्यान करने के बाद, नेत्रों में आँसू और व्याकुल हृदय से, काँपती हुई अवस्था में हाथ जोड़कर उसने कहा - 'मैं उसे क्यों न पहचानूँ? उसने अग्नि स्थापना के समय एक हजार बार यज्ञ की स्थापना की है॥ 10॥
After meditating for a while, with tears in his eyes and a disturbed heart, he said with folded hands in a trembling state - 'Why would I not recognize him? He has established the sacrificial fire a thousand times at the time of setting up the fire.॥ 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥