श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 199: राजा इन्द्रद्युम्न तथा अन्य चिरजीवी प्राणियोंकी कथा  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.199.1 
वैशम्पायन उवाच
मार्कण्डेयमृषय: पाण्डवा: पर्यपृच्छन्नस्ति कश्चिद् भवतश्चिरजाततर इति॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! ऋषियों और पाण्डवों ने मार्कण्डेयजी से पूछा - 'भगवन्! इस संसार में आपसे पूर्व उत्पन्न कोई सनातन जीव है या नहीं?'
 
Vaishampayanji says – Janamejaya! The sages and Pandavas asked Markandeyaji - 'Lord! Is there any eternal living being in this world who was born before you or not?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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