Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.198.26: सिभी ने कहा, "मैं यह दान यश के लिए नहीं देता। मैं यह दान धन या भोग के लोभ से नहीं देता। यह धर्म का मार्ग है। पापी लोग इसका अनुसरण नहीं कर सकते। मैं यह सब इसी समझ के साथ करता रहता हूँ।" 26 | mahabharat अध्याय 3.198: देवर्षि नारदद्वारा शिबिकी महत्ताका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शिबिरुवाच
नैवाहमेतद् यशसे ददानि
न चार्थहेतोर्न च भोगतृष्णया।
पापैरनासेवित एष मार्ग
इत्येवमेतत् सकलं करोमि॥ २६॥
अनुवाद
सिभी ने कहा, "मैं यह दान यश के लिए नहीं देता। मैं यह दान धन या भोग के लोभ से नहीं देता। यह धर्म का मार्ग है। पापी लोग इसका अनुसरण नहीं कर सकते। मैं यह सब इसी समझ के साथ करता रहता हूँ।" 26
Sibhi said, "I do not give this donation for fame. I do not give it for money or for the greed of pleasures. This is the path of the righteous. Sinful people cannot follow it. I keep doing all this with this understanding." 26.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥