श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 198: देवर्षि नारदद्वारा शिबिकी महत्ताका प्रतिपादन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.198.25 
तस्य राजर्षेर्विधाता तेनैव वेषेण परीक्षार्थमागत इति तस्मिन्नन्तर्हिते अमात्या राजानमूचु:। किं प्रेप्सुना भवता इदमेवं जानता कृतमिति॥ २५॥
 
 
अनुवाद
राजा शिबि की परीक्षा लेने के लिए स्वयं विधाता ब्राह्मण का वेश धारण करके आए थे। उनके अन्तर्धान हो जाने पर राजा के मंत्रियों ने उनसे पूछा - 'महाराज! आप क्या चाहते हैं? जिसके लिए आपने सब कुछ जानते हुए भी ऐसा दुस्साहस किया है?'॥ 25॥
 
The Creator himself had come in the guise of a Brahmin to test King Shibi. After he disappeared, the King's ministers asked him - 'Maharaj! What do you want? For which you have done such a daring act despite knowing everything?'॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)