Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.198.24: राजा ने जब ऊपर देखा, तो उसका पुत्र उसके सामने खड़ा था। वह भगवान के पुत्र के समान दिव्य वस्त्राभूषणों से विभूषित था। उसके शरीर से पवित्र सुगन्ध निकल रही थी। सब कुछ पूर्ववत् करके ब्राह्मणदेव अदृश्य हो गए॥ 24॥ | mahabharat अध्याय 3.198: देवर्षि नारदद्वारा शिबिकी महत्ताका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स ह्युद्वीक्षमाण: पुत्रमपश्यदग्रे तिष्ठन्तं देवकुमारमिव पुण्यगन्धान्वितमलङ्कृतं सर्वं च तमर्थं विधाय ब्राह्मणोऽन्तरधीयत॥ २४॥
अनुवाद
राजा ने जब ऊपर देखा, तो उसका पुत्र उसके सामने खड़ा था। वह भगवान के पुत्र के समान दिव्य वस्त्राभूषणों से विभूषित था। उसके शरीर से पवित्र सुगन्ध निकल रही थी। सब कुछ पूर्ववत् करके ब्राह्मणदेव अदृश्य हो गए॥ 24॥
‘When the king looked up, his son was standing in front of him. He was adorned with divine clothes and ornaments like a son of the God. A sacred fragrance was emanating from his body. The Brahmin-God disappeared after setting everything as it was before.॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥